सजा नहीं सपना होती है बेटी,
गैरो के बिच अपना होती हे बेटी |
रंगों से सजाती हे घरो को,
आँगन की कल्पना होती हे बेटी |
वेदना नहीं वरदान होती हे बेटी,
आस्था और अरमान होती हे बेटी |
वजूद उसका कभी मिट सकता नहीं,
भार नहीं जीवन का सार होती हे बेटी |
जीवन की उलझी रहो के बीच,
एक सहज संवेदना होती हे बेटी |
हक़ होता हे पर हक़ की बात कभी करती नहीं ,
हकीकत और हसरतों का इन्द्रधनुष होती हे बेटी |
आँखों में रखकर पलकों पर सजाती हे जीवन ,
सच कहो तो कभी सीता तो कभी राधा होती हे बेटी |